Monday, 7 September 2015

प्रधानमंत्री कार्यलय ने शिक्षा-क्रांति के प्रकृति और समाज सेवा (स्वच्छताग्रह) की ओर गौर फरमाया, सहृदय आभार l


माननीय हि. प्र. सरकार 'शिक्षा-क्रांति' के 'स्वच्छता के लिए आग्रह' का क्यों संज्ञान नहीं ले रही ? जबकि केंद्र सरकार ने सर्व जन हित के इस कार्य के लिए ज्यादा कुछ नहीं, कम से कम लिखित रूप से गौर तो फरमाया है l गौरतलब है कि 'शिक्षा-क्रांति' कई बरसों से (निर्मल-भारत अभियान और स्वच्छ-भारत अभियान से भी पहले से ) देश को स्वच्छ बनाने की दिशा में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के माध्यम से प्रयास रत रही है l यदि स्वच्छता को राजनीति के महत्व का विषय बनाया गया, तो हमारा देश कभी भी स्वच्छ नहीं हो सकता l गंदगी के रहते, इसका सही मायनों में विकास नहीं हो सकता, बेशक आर्थिक लिहाज़ से हम चाहे जितनी मर्जी उन्नति कर लें l   विकास के मार्ग पर यदि देश एक कदम आगे बढ़ता है, तो गंदगी और भ्रष्टाचार इसे दो कदम पीछे की ओर धकेलते रहेंगें l

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